चाईबासा/रांची: झारखंड के चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित पांच मासूम बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले आरोपी लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जारी वारंट के बाद शनिवार को की गई।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पिछले साल अक्टूबर 2025 का है, जब चाईबासा सदर अस्पताल में इलाज करा रहे पांच बच्चों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान एचआईवी (HIV) संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था। जांच रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया था। घटना के बाद आरोपी लैब टेक्नीशियन फरार चल रहा था।
प्रशासनिक कार्रवाई
घटना के सामने आने के बाद झारखंड सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए:
तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. सुशांतो कुमार मांझी और ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. दिनेश सवैया को निलंबित कर दिया था।
आरोपी अनुबंधकर्मी लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार की सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी गई थीं।
हाईकोर्ट में याचिका: 1-1 करोड़ मुआवजे की मांग
संक्रमित बच्चों के परिवारों ने न्याय के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
मुआवजा: प्रत्येक पीड़ित बच्चे के लिए 1-1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग।
इलाज: आजीवन निःशुल्क चिकित्सा उपचार और अन्य सुविधाएं।
मेडिकल बोर्ड: बच्चों की दीर्घकालिक जरूरतों का आकलन करने के लिए एक विशेष चिकित्सा बोर्ड का गठन।
काउंसलिंग: सामाजिक कलंक (Social Stigma) से निपटने के लिए परामर्श सहायता।
पीड़ित परिवारों की स्थिति
याचिका के अनुसार, ये सभी बच्चे पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले के अनुसूचित जनजाति (ST) और ओबीसी (OBC) वर्ग से आते हैं। इनके परिवार दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं और कच्चे मकानों में रहते हैं। याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा घोषित 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि को पूरी तरह से अपर्याप्त बताया है।
नोट: हाईकोर्ट द्वारा मामले का संज्ञान लेने और सख्त निर्देश जारी करने के बाद ही पुलिस ने इस मामले में सक्रियता दिखाई, जिसके परिणामस्वरूप अब मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है।




