🚨 राधा गोविंद विश्वविद्यालय की मान्यता पर मंडराया संकट! जांच कमेटी की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा
रांची/रामगढ़। राधा गोविंद विश्वविद्यालय को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय से संबंधित उच्च शिक्षा विभाग को सौंपी गई जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद अब इसकी मान्यता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित नियमों की कथित अवहेलना किए जाने और कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है
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जांच के दौरान विश्वविद्यालय से जुड़े शैक्षणिक कार्यों और दस्तावेजों की पड़ताल की गई। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि छात्रों को पास कराने से लेकर फर्जी डिग्री बांटने तक के प्रमाण सामने आए हैं। साथ ही महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा में एक साथ 33 अभ्यर्थियों की सफलता ने भी विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
जांच कमेटी ने मंत्री को सौंपी रिपोर्ट
मामले की जांच के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी में रांची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सहित अन्य पदाधिकारी भी शामिल थे। जांच पूरी होने के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट विभागीय मंत्री को सौंप दी है।
रिपोर्ट में विश्वविद्यालय से संबंधित कई कथित गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने के कारण इसमें दर्ज सभी बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
एक ही परीक्षा में 33 अभ्यर्थियों की सफलता बनी सवाल
मामले का एक अहम पहलू महिला पर्यवेक्षिका परीक्षा से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के तीन बैचों से जुड़ी 33 अभ्यर्थियों के एक साथ सफल होने को लेकर सवाल उठे हैं। जांच में छात्रों के नामांकन से लेकर उनकी उपस्थिति दर्ज करने वाली पंजिकाओं समेत विभिन्न रिकॉर्ड को भी देखा गया।
कमेटी ने कथित तौर पर ऐसे मामलों की भी जांच की है, जिनमें एक ही व्यक्ति की उपस्थिति दर्ज कराने से लेकर अन्य कार्य पूरे किए जाने से संबंधित सवाल सामने आए।
मान्यता रद्द होने की चर्चा से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के आधार पर अब विश्वविद्यालय की मान्यता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, यदि जांच में सामने आए आरोप प्रमाणित होते हैं और सरकार कार्रवाई का निर्णय लेती है, तो राधा गोविंद विश्वविद्यालय की मान्यता पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, अंतिम निर्णय राज्य सरकार और संबंधित सक्षम प्राधिकरण द्वारा लिया जाना है। फिलहाल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।









